गूगल ने आज के दिन पैरालंपिक खेलों का निर्माण करने वाले, न्यूरोलॉजिस्ट, विकलांग लोगों के लिए खेल के पिता लुडविग गुट्टमैन को सम्मानित करने के लिए गूगल डूडल लगाया है, जो की उनके 122 वें जन्मदिन के अवसर पर लगाया गया है।
लुडविग गुट्टमैन का जन्म 3 जुलाई 1899 को Toszek, Poland में हुआ था, अपने परिवार में यह सबसे बड़े थे, सन 1924 में लुडविग गुट्टमैन ने एमडी की उपाधि प्राप्त की थी, उन्होंने रीढ़ की हड्डी पर लगने वाली चोटों के ऊपर शोध किया।
1938 में यहूदियों के उत्पीड़न की घटना क्रिस्टलनाचट और जर्मनी में बढ़ने लगी जिस कारण गुटमैन और उनके परिवार को जर्मनी छोड़ना पड़ा, और इसके बाद वह सन 1939 में इंग्लैंड आने में सफल रहे।
इंग्लैण्ड में वह पैरापलेजिया में शोध करने लगे, सन 1944 में उन्होंने स्टोक मैंडविल अस्पताल में नेशनल स्पाइनल इंजरी सेंटर के निदेशक के रूप में भी काम किया।
1948 में, वह मैंडेविले रिहैबिलिटेशन अस्पताल में एक स्टोक चिकित्सक थे, उन्होंने एक 16-व्यक्ति तीरंदाजी प्रतियोगिता का आयोजन किया, जो व्हीलचेयर उपयोगकर्ताओं के लिए पहली आधिकारिक प्रतिस्पर्धी खेल आयोजनों में से एक थी। बाद में इस प्रतियोगिता को “स्टोक मैंडविल गेम्स” या “विकलांगों के लिए ओलंपिक” नाम दे दिया गया।
लुडविग गुटमैन ने अंतर्राष्ट्रीय स्टोक मैंडविल खेलों की सुविधा प्रदान की। 1961 में लुडविग गुटमैन ने इंटरनेशनल मेडिकल सोसाइटी ऑफ पैरापलेजिया जो की अब इंटरनेशनल स्पाइनल कॉर्ड सोसाइटी है और ब्रिटिश स्पोर्ट्स एसोसिएशन फॉर द डिसेबल्ड (एक्टिविटी एलायंस) की भी स्थापना की।
1976 में, पहले पैरालम्पिक शीतकालीन खेल (स्वीडन) में आयोजित किए गए और इनमे पहली बार न केवल व्हीलचेयर उपयोगकर्ताओं ने भाग लिया, बल्कि अन्य श्रेणियों के विकलांग खिलाड़ी भी थे।
1966 में महामहिम महारानी द्वारा उनके कामो के लिए उन्हें नाइट की उपाधि दी गयी। लुडविग गुट्टमैन के सम्मान में 2012 में लन्दन में स्टोक मैंडविले स्टेडियम में उनकी कांस्य प्रतिमा लगायी गयी।
18 मार्च 1979 को दिल का दौरा पड़ने से 80 वर्ष की आयु में लुडविग गुट्टमैन का निधन हो गया।
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